बच्चे झाग क्यों निकलते हैं?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:30

कहते हैं कि प्रेग्‍नेंसी में अगर महिलाओं की खाने की क्रेविंग को पूरा न किया जाए, तो होने वाले बच्‍चे की लार टपकती रहती है। जी हां, भारत में इस तरह की धारणाएं बहुत प्रचलित हैं लेकिन इसके पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों के बारे में कोई नहीं जानता है।

आपने भी सुना होगा कि बच्‍चे का लार टपकाना, इस बात का संकेत होता है कि प्रेग्‍नेंसी में उसकी मां की फूड क्रेविंग पूरी नहीं हो पाई है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर बच्‍चे मुंह से लार क्‍यों निकलती है।

बच्‍चों में लार टपकाने के कारण

बच्‍चों की कई कारणों से लार निकल सकती है, जैसे कि :

6 से 8 महीने तक शिशु के दांत नहीं आते हैं लेकिन इसकी प्रक्रिया 3 महीने की उम्र से ही शुरू हो जाती है। इसलिए 3 महीने का बच्‍चा लार निकालना शुरू कर देता है। दांत आने पर लार ज्‍यादा निकलने लगती है।
अगर बच्‍चे को लंबे समय तक मुंह खुला रखने की आदत है, तो उसकी लार निकल सकती है।
जब बच्‍चा किसी चीज पर ध्‍यान लगाते हैं तो उनका दिमाग उत्तेजित हो जाता है। इससे सलाइवा ज्‍यादा बनता है और बच्‍चे सलाइवा को निगलना नहीं जानते हैं जिससे उनकी लार टपकने लगती है।

​शिशु का ज्‍यादा लार टपकाना

लार टपकाने की नॉर्मल उम्र के बाद शिशु के मुंह में ज्‍यादा सलाइवा बनने पर बच्‍चे की ज्‍यादा लार गिरने लगती है। अगर दो साल की उम्र के बाद भी बच्‍चे की लार निकल रही है, तो आपको डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।

अधिक सलाइवा बनने के साथ-साथ मुंह और जीभ के खराब तालमेल की वजह से भी लार टपक सकती है। इस तालमेल की कमी के कारण बच्‍चा सलाइवा को निगल नहीं पाता है।

​बच्‍चों में लार टपकाने का इलाज

शिशु के शारीरिक विकास में लार टपकाना एक अहम हिस्‍सा है। हालांकि, अगर दो साल की उम्र के बाद भी बच्‍चा लार निकाल रहा है तो यह सामान्‍य बात नहीं है। इस स्थिति में आपको डॉक्‍टर से बात करनी चाहिए। बच्‍चे में कुछ लक्षणों की जांच करने के बाद ही डॉक्‍टर इलाज निर्धारित करते हैं। ये लक्षण हैं :

अगर बच्‍चा होंठों को बंद कर सकता है और जीभ को घुमा सकता है।
बच्‍चे के निगलने की क्षमता ठीक हो।
नाक बंद या भरी हो।
बच्‍चे का नैचुरल स्वालोइंग (निगलना) रिफ्लेक्‍स हो।
बच्‍चे का पोस्‍चर और जबड़ा ठीक है या नहीं।

​क्‍या इलाज देते हैं डॉक्‍टर

इन लक्षणों को जांचने के बाद डॉक्‍टर निम्‍न ट्रीटमेंट दे सकते हैं :

बच्‍चे की डाइट में एसिडिक चीजों को कम रखना।
बच्‍चे की निगलने की क्षमता पर काम करना।
चेहरे की मांसपेशियों को टाइट करना।
बच्‍चे की ओरल सेंसरी में सुधार लाना जिससे वो समझ पाए कि उसका मुंह और चेहरा कब गीला हो रहा है।
जबड़े, गालों और होंठों को ओरल मोटर थेरेपी से मजबूत करना है। इसे थेरेपी से बच्‍चा सलाइवा को ठीक तरह से निगल पाता है।
इन मेडिकल कारणों के बारे में जानकर आप समझ ही गए होंगे कि बच्‍चे के लार टपकाने का संबंध मां की प्रेग्‍नेंसी क्रेविंग से नहीं है।

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